November 21, 2017

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सोयाबीन फसल में कीट नियंत्रण हेतु किसानों को सलाह

 

उज्जैन 12 सितम्बर। भारतीय कृषि अनुसंधान केन्द्र इन्दौर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सोयाबीन फसल में कीट नियंत्रण की सलाह दी है। जिले में वर्तमान में खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक है, परन्तु कहीं-कहीं पर हल्का कीट प्रकोप देखा जा रहा है। इसके नियंत्रण के लिये किसान कीटनाशकों का उपयोग करें।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जिन क्षेत्रों में सोयाबीन फसल पर सफेद सूण्डी का प्रकोप हुआ था वहां अगली फसल लेने के पूर्व क्विनालफॉस का भुरकाव कर जमीन में अच्छी तरह से मिला दें। कुछ क्षेत्रों में पत्ती खाने वाली इल्लियों का प्रकोप देखा गया है। ऐसे स्थानों पर किसान तुरन्त क्विनालफॉस पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें। पत्ती खाने वाले वाली इल्लियों के साथ-साथ रस चूसने वाली कीट जैसे- सफेद मक्खी, हरा जेसिड आदि का प्रकोप है, वहां पर थायामिथोक्सम व लेम्बड़ा, सायहेलोथ्रिन या बीटासायफलूथ्रिल पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें। जिन किसानों के खेतों में फसल में गर्डल बीटल का प्रकोप प्रारम्भ हो चुका है, वहां किसान थायक्लोप्रीड या प्रोफेनोफॉस या ट्राइजोफॉस या बीटासायफ्लूथ्रील पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जिन किसानों के खेतों में सोयाबीन की फसलों में मोजाइक/पीली मोजाइक बीमारी का प्रकोप प्रारम्भ हो गया है, उन किसानों को सलाह दी जाती है कि इससे ग्रसित पौधों को अपने खेत से उखाड़कर गड्ढे में दबा दें तथा इसको अन्य पौधों पर फैलाने वाले रोगवाहक कीटों के नियंत्रण के लिये थायामिथोक्सम या साइहेलोथ्रिल या बीटासायफ्लूथ्रील पानी के साथ मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिये।

क्रमांक 3110                                     संतोष कुमार उज्जैनिया (मो.नं.-9425379653)/जोशी