May 23, 2018

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिक से अधिक किसानों का बीमा कराया जाये, जिले की प्रत्येक सोसायटियों को 500-500 का लक्ष्य निर्धारित, एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

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उज्जैन 05 दिसम्बर। रबी फसल के लिये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिक से अधिक ऋणी  एवं अऋणी किसान के प्रस्ताव बैंक में जमा कराने के लिये बीमा कराया जाये। इसकी अन्तिम तिथि 15 जनवरी 2018 निर्धारित है। उज्जैन जिले की प्रत्येक सोसायटियों के प्रबंधकों को 500-500 किसानों का बीमा कराने का लक्ष्य दिया गया है। बीमा योजना के तहत पैदावार के आंकड़े निर्धारित करने की अन्तिम तिथि 30 जून 2018 निर्धारित है। नई योजना सभी कृषकों के लिये लागू की गई है। इस सम्बन्ध में दिशा-निर्देश देने के लिये कृषि से जुड़े समस्त विभागों के अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला विक्रम कीर्ति मन्दिर में आयोजित की गई। कार्यशाला में अपर कलेक्टर श्री वसन्त कुर्रे सहित सभी तहसीलों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं जिले की समस्त सोसायटियों के प्रबंधक उपस्थित थे।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए अपर कलेक्टर श्री वसन्त कुर्रे ने कहा कि सबके अथक प्रयासों से शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है। उन्होंने उपस्थित कृषि विभाग के अमले से कहा कि  प्रदेश को कई बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त हो चुका है। श्री कुर्रे ने कहा कि नई योजना आने पर उसके क्रियान्वयन में थोड़ी-बहुत कठिनाई जरूर आती है। मैदानी अमले के प्रयासों से योजना का सफल क्रियान्वयन होता है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे ने जिले की 172 सोसायटियों को प्रत्येक एक सोसायटी को 500 का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की रबी फसल का बीमा कराने का लक्ष्य दिया है। कलेक्टर के द्वारा दिये गये लक्ष्य को 15 जनवरी 2018 तक अनिवार्यत: पूरा किया जाये।

जानकारी कॉपरेटिव पोर्टल पर अंकित की जाये

अंकित नहीं करने वाले बैंक प्रबंधक को नोटिस जारी किया जायेगा

कार्यशाला में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के महाप्रबंधक श्री डीके सरोठिया ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विस्तार से जानकारी दी और कहा कि कलेक्टर के द्वारा दिये गये लक्ष्य को हमें अनिवार्य रूप से पूरा करना है। उन्होंने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के प्रबंधकों को निर्देश दिये हैं कि वह जानकारी कॉपरेटिव पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अंकित करें, अंकित नहीं करने वाले बैंक प्रबंधकों को नोटिस जारी किया जायेगा और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जायेगी। श्री सरोठिया ने समस्त सोसायटियों के प्रबंधकों को निर्देश दिये कि किसानों को किसी प्रकार की खाद में समस्या न आये। इसके लिये प्रत्येक सोसायटियों में लगभग पांच मैट्रिक टन यूरिया का भण्डारण होना चाहिये। जिस किसी भी सोसायटी में इससे कम यूरिया का स्टाक है तो वह तुरन्त अपने वरिष्ठों को अवगत करायें, ताकि यूरिया की मांग की पूर्ति समय पर की जा सके और किसानों को असुविधा न हो।

कृषि विभाग के उप संचालक श्री सीएल केवड़ा ने कार्यशाला में उपस्थित अमले को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिये केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रारम्भ की है। इसमें किसानों को कम प्रीमियम देना है। बीमा कंपनियों को रबी फसलों के प्रीमियम रेट का सिर्फ डेढ़ फीसदी एवं खरीफ फसल का दो प्रतिशत किसानों को देना पड़ेगा। बागवानी फसलों के मामले में किसानों को पांच प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। प्रीमियम की शेष राशि केन्द्र और राज्य की सरकारें बराबर देंगी। यह योजना 2016 से लागू की गई है। श्री केवड़ा ने कहा कि इस योजना में सरकार द्वारा इस वर्ष प्रदेश में 17600 करोड़ रूपये खर्च करने का अनुमान है। केन्द्र ने इसके लिये 8800 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। इतनी ही रकम राज्य सरकार देगी। वर्तमान में कर्ज लेने वाले किसानों के लिये फसल बीमा लेना जरूरी है। कार्यशाला में इस अवसर पर लीड बैंक के मैनेजर श्री जाधव, डीसीआर श्री गुप्ता, आईसीआईसीआई बैंक के श्री सूफी आदि ने भी योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

योजना से लाभ

फसल बीमा योजना लागू करने का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों से किसी भी अधिसूचित फसल के नष्ट होने की स्थिति में किसानों को आवरण तथा वित्तीय सहायता प्रदान करना है। साथ ही किसानों को खेती कार्य में बनाये रखने के लिये उनकी आय को स्थिर करने का एक उपाय है। किसानों को नवीन, अभिनव और प्राकृतिक कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। उज्जैन जिले में इस बीमा योजना को क्रियान्वित करने के लिये आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड तथा एचडीएफसी एर्गो को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कृषकों को बीमा कराने के लिये भू-अधिकार पुस्तिका, सक्षम अधिकारी द्वारा दिया गया बुवाई प्रमाण-पत्र, पूर्णत: भरा हुआ प्रस्ताव फार्म एवं पहचान-पत्र आवश्यक है। बीमित फसलों के लिये पटवारी हलका स्तर बीमा की इकाई निर्धारित की गई है।

योजना में कवर होने वाले जोखिम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत सभी प्रकार की फसलों रबी, खरीफ, वाणिज्यिक और बागवानी को शामिल किया गया है। योजना में कवर होने वाले जोखिम इस प्रकार हैं- उपज नुकसान के आधार पर इस योजना में बिजली गिरने, तूफान, ओला पड़ने, चक्रवात, अंधड़, बवंडर, बाढ़, जलभराव, जमीन धंसने, सूखा, खराब मौसम, कीट एवं फसल को होने वाली बीमारियां आदि जोखिम से फसल को होने वाले नुकसान को शामिल कर एक ऐसा बीमा कवर दिया जाता है, जिसमें इनसे होने वाले सारे नुकसान से सुरक्षा प्रदान की जाती है।

प्रधानमंत्री बीमा योजना से किसानों को मिलने वाले अन्य लाभ

संरक्षित बुवाई के आधार पर यदि बीमित किसान बुवाई-रोपाई के लिये खर्च करने के बावजूद खराब मौसम की वजह से बुवाई-रोपाई नहीं कर सकते तो वे बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक के नुकसान का दावा ले सकेंगे। फसल कटाई के बाद रखी फसल को चक्रवात, बेमौसम बारिश और स्थानीय आपदा जैसे- ओलों, जमीन धंसने और जलभराव से होने वाले नुकसान का अंदाजा प्रभावी खेती के आधार पर किया जायेगा। इसके अनुसार किसानों के नुकसान का आंकलन करके दावे तय किये जायेंगे। नई बीमा योजना में यह नियम बनाया गया है कि फसल कटाई के बाद खेत में पड़ी हुई फसल को 14 दिन के भीतर चक्रवात और बेमौसम बरसात से नुकसान होने पर भी खेतवार आंकलन करके भुगतान किया जायेगा। बीमा की गई फसल की खराब मौसम के कारण बुवाई-रोपाई न कर पाने पर बीमा मूल राशि का 25 फीसदी सीधे किसान के खाते में जमा कराने का प्रावधान किया गया है। नई योजना में स्मार्टफोन से फसल कटाई के आंकलन की तस्वीरें खींचकर सर्वर पर अपलोड की जायेंगी। इससे फसल कटाई के आंकड़े जल्द से जल्द बीमा कंपनी को मिल सकेंगे। इससे दावों का भुगतान करने में लगने वाले समय को कम किया जायेगा। रिमोट सेंसिंग और ड्रोन जैसी तकनीक के इस्तेमाल से फसल कटाई प्रयोग की संख्या को कम करने में सहायता मिलेगी। विस्तृत जानकारी किसान कॉल सेन्टर के टोलफ्री नम्बर 18001801551 पर फोन लगाकर प्राप्त की जा सकती है।

(फोटो संलग्न)

क्रमांक 3970                                          संतोष कुमार उज्जैनिया (मो.नं.-9425379653)/जोशी