July 18, 2018

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जिनके घर पर ट्रेक्टर, जीप व 10 बीघा जमीन है, वे स्वेच्छा से अपने नाम बीपीएल सूची से हटवायें, साधन सम्पन्न होकर एक रूपये किलो अनाज ले रहे व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही होगी, मप्र राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष ने प्रेस से चर्चा की

उज्जैन 20 दिसम्बर। मप्र राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री राजकिशोर स्वाई ने कहा है कि बीपीएल सूची से ऐसे लोगों को स्वयं हट जाना चाहिये, जो साधन सम्पन्न हैं। जिन लोगों के पास ट्रेक्टर, जीप व 10 बीघा जमीन है और वे एक रूपये किलो अनाज का लाभ ले रहे हैं, तो यह ठीक बात नहीं है। आयोग सभी जिलों के कलेक्टर्स को इस बारे में निर्देश देगा कि ऐसे लोगों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये एवं जुर्माने के रूप में लिये गये लाभ का डेढ़ गुना रूपया उनसे वसूल किया जाये। उन्होंने कहा कि सागर संभाग में एक अभियान के दौरान 39 हजार लोगों ने अपने बीपीएल कार्ड सरेण्डर किये हैं। सभी जिलों में इसी तरह का जन-जागरण अभियान चलाना आवश्यक है। मप्र राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री स्वाई एवं सदस्य श्री किशोर खंडेलवाल, श्री गोरेलाल अहिरवार, श्री वीरसिंह चौहान, श्रीमती स्नेहलता उपाध्याय एवं श्रीमती दुर्गा डाबर ने आज सिंहस्थ मेला कार्यालय में प्रेस से चर्चा कर आयोग के गठन, कार्यों एवं अधिकारों पर चर्चा की।

अध्यक्ष श्री स्वाई ने बताया कि राज्य खाद्य आयोग का कार्यालय मप्र सतपुड़ा भवन में है तथा आयोग का गठन 20 जुलाई 2017 को किया गया है। आयोग को चार प्रमुख योजनाओं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पूरक पोषण आहार, मध्याह्न भोजन एवं मातृत्व कल्याण योजना के मूल्यांकन एवं समीक्षा का दायित्व सौंपा गया है। आयोग गरीब परिवारों को खाद्यान्न एवं पोषण के अधिकार से जुड़ी हुई योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से सम्बन्धित जन-सामान्य से प्राप्त शिकायतों की एवं स्व-प्रेरणा से भी शिकायत की जांच कर सकता है। इन योजनाओं का बेहतर ढंग से संचालन के लिये राज्य शासन एवं स्थानीय निकायों को सलाह देना भी आयोग का कार्यक्षेत्र है। योजनाओं के समबन्ध में प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिये मध्य प्रदेश शासन द्वारा कलेक्टर को जिला शिकायत निवारण प्राधिकारी घोषित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति या हितग्राही जिला शिकायत निवारण प्राधिकारी के आदेश से व्यथित होता है तो वह आयोग को अपील कर सकता है। भारत शासन की नीति के अनुसार प्रदेश की जनंसख्या के 75 प्रतिशत लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ दिया जाना था, किन्तु प्रदेश में 80 प्रतिशत लोगों को योजना का लाभ देते हुए रियायती दर पर एक रूपये प्रतिकिलो गेहूं, चावल एवं नमक उपलब्ध कराया जा रहा है। मातृत्व कल्याण योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं को छह हजार रूपये तीन किश्तों में दिये जा रहे हैं। प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय शालाओं में अध्ययनरत सभी बच्चों को गर्म भोजन देने के लिये मध्याह्न भोजन योजना संचालित है।

प्रेस से चर्चा करते हुए सदस्य श्री किशोर खंडेलवाल ने बताया कि खाद्य आयोग के आग्रह पर राज्य शासन ने यह निर्देश जारी किये हैं कि पीओएस मशीन यदि निरन्तर खराब रहती है तो आधार कार्ड के आधार पर एक रजिस्टर में इंट्री कर सम्बन्धित उपभोक्ता को खाद्यान्न दिया जाये। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सम्बन्धित विभागों को अपनी-अपनी वेब साइट पर हितग्राहियों की सूची उपलब्ध कराना अनिवार्य है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक ग्राम पंचायतों में जनवरी माह के अन्त तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान खोली जायेगी। सभी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिये गये हैं। (फोटो संलग्न)

क्रमांक 4084 हरिशंकर शर्मा/जोशी