September 21, 2018

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सफलता की कहानी-मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना से लाभान्वित हुआ गोविन्द, अब सुन भी सकता है और बोल भी, पहले लाचार था, लेकिन अब बनेगा मां का सहारा

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उज्जैन 14 जून। पिता का साया खो चुके छह वर्ष के बालक गोविन्द को जब उसकी मां  राजूबाई ने पहली बार अपनी आवाज पर पलटकर देखते हुए महसूस किया तो मानों उसकी खुशी का सैलाब आसमान छू गया।

आज के दिन उसे वह समय याद आया जब गोविन्द मात्र आठ माह का था और सर्पदंश से उसके पिता तेजूलाल की मृत्यु हो गई थी। ‍सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद घर को चलाने की जिम्मेदारी गोविन्द की मां पर आ गई थी। समय को अपने अनुकूल न पाकर वह गोविन्द को लेकर अपने माता-पिता के घर चली गई थी। वहीं पर वह मजदूरी करके गोविन्द का भरण-पोषण करती थी। थकी-हारी जब वह घर लौटती थी तो गोविन्द की उम्र के साथ-साथ बड़ते कदमों को देखकर खुश हो जाती थी। सोचती थी कि गोविन्द बड़ा होकर उसका दु:ख दूर करेगा और उसका सहारा बनेगा, लेकिन धीरे-धीरे कुछ वर्षो में उसका यह भ्रम टूटने लगा। उसे महसूस होने लगा कि अपनी उम्र के दूसरे बच्चों के साथ खेलते वक्त गोविन्द न तो बोलता है और शायद न ही सुनता है। लगातार चिंतित रहने के कारण उसका मन काम में नहीं लगता था और उसे गोविन्द के आने वाले भविष्य को लेकर चिन्ता सताने लगी थी। घर के लोगों की सलाह पर उसने स्थानीय स्तर पर प्रायवेट चिकित्सक को दिखलाया। चिकित्सक द्वारा उसे अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक के पास भेजा गया, जहां पहुंचकर उसे पता चला कि गोविन्द सुन भी नहीं सकता एवं बोलने में भी सक्षम नहीं है। चिकित्सक द्वारा गोविन्द के सम्पूर्ण उपचार का खर्चा लगभग सात लाख रूपयें बताया गया।

निराश मन से गोविन्द की मां राजूबाई वापस अपने घर ग्राम इन्दौख तहसील महिदपुर लौट आई। आंगनवाड़ी केन्द्र में नियमित चैकअप के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर.बी.एस.के). के दल द्वारा गोविन्द को सुनने में परेशानी एवं बोलने-चालने में कठिनाई का आभास हुआ। उन्होंने गोविन्द की मां को बुलाकर उसके बारे में जानकारी ली। गोविन्द की मां ने बताया कि उसने उसका उपचार करवाने का प्रयास किया था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह इलाज करने में सक्षम नहीं थी। दल द्वारा उसे तुरन्त जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र (डी.ई.आई.सी.) जिला चिकित्सालय उज्जैन में भेजा गया, जहां कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ.राजू निदारिया द्वारा तुरन्त जांच हेतु पहुंचाया गया एवं चैकअप करवाकर गोविन्द का प्रकरण मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना में पंजीकृत करवाया गया।

गोविन्द को आर.बी.एस.के. समन्वयक श्री वीरेन्द्र वर्मा अपने साथ लेकर दिव्य एडवांस ईएनटी क्लीनिक भोपाल लेकर गये, जहां सम्पूर्ण औपचारिकताएं पूर्ण करने के पश्चात गोविन्द का सफल ऑपरेशन (कॉक्लीयर एम्पलांट) करवाया गया। ऑपरेशन हेतु शासन द्वारा कुल छह लाख 50 हजार रूपये का व्यय किया गया। ऑपरेशन के उपरांत गोविन्द का नियमित फॉलोअप लिया जा रहा है एवं उसे स्पीच थैरेपी प्रदान की जा रही है।

गोविन्द अब सुनने एवं बोलने लगा है। उसकी मां जब उसे नाम से पुकराती है तो वह न केवल प्रतिक्रिया देता है बल्की मां शब्द का उच्चारण भी स्पष्ट रूप से करता है। अब उसकी मां को उसके भविष्य की चिन्ता नहीं है, उसे विश्वास है कि उसका बच्चा पढ़-लिखकर उसकी परेशानियों का हल निकालेगा और उसे सहारा देगा। शासन की इस योजना का लाभ प्राप्त करके वह मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को कोटी-कोटी हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करती है। इस योजना के कारण वह इतना महंगा ऑपरेशन निःशुल्क करवाकर अपने बच्चे की जन्मजात विकृति को हमेशा के लिये खत्म कर सकी है।

(फोटो संलग्न)

क्रमांक 1655                                                               अनिकेत शर्मा/जोशी