September 21, 2018

Latest News

“सफलता की कहानी” पहले रोजगार के लिये दर-दर की ठोकरें खाना पड़ती थी, अब स्वयं दूसरों को काम देते हैं अंकेश और हर्ष, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना ने बनाया आत्म निर्भर, फैक्टरी के बनें मालिक

उज्जैन 09 अगस्त। उज्जैन निवासी 28 वर्षीय अंकेश राठी को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार प्राप्त करने के लिये कई जगह भटकना पड़ा, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। काफी जगह प्रयास करने के बाद भी उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिल सकी। एक समय ऐसा भी आया, जब वे अपने परिवार के लिये नासूर बन गये। सन्देश अपना स्वयं का उद्योग स्थापित करना चाहते थे, ताकि उनके जैसे और भी युवाओं को कमाई का एक सशक्त माध्यम मिल सके।
प्रतिदिन की तरह रोजगार की तलाश में घर से निकलकर अंकेश जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र पहुंचे, जहां से उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली। बस फिर क्या था, अंकेश ने सारी औपचारिकताएं पूरी कीं, आवेदन दिया और केवल 15 दिनों के भीतर उन्हें 50 लाख रूपये का लोन मिल गया। आज अंकेश मक्सी रोड स्थित शंकरपुर में एक फैक्टरी के मालिक हैं। उनकी फैक्टरी में फूड प्रोसेसिंग का काम किया जाता है।
कुछ ऐसी ही कहानी है 27 वर्षीय युवा हर्ष सामरिया की। जब इरादे बुलन्द हों तो सारे बन्द दरवाजे भी अपने आप खुल जाते हैं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दूसरे युवाओं की तरह हर्ष को नौकरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, बल्कि वे स्वयं का व्यवसाय करना चाहते थे। कई प्रायवेट लोन कंपनियों के सामने अपना प्रोजेक्ट रखा, लेकिन उनके पास जोश तो था पर अनुभव की कमी थी। इसी कमी के कारण कोई निजी कंपनी हर्ष के प्रोजेक्ट पर इतना बड़ी राशि लगाना नहीं चाहती थी। हालांकि हर्ष सिक्योरिटी की राशि जमा करने में सक्षम थे, लेकिन फिर भी कहीं से उन्हें व्यवसाय के लिये लोन नहीं मिल रहा था। उनकी परियोजना की लागत इतनी बड़ी थी कि कोई फर्म इतनी बड़ी राशि की सहायता देने को तैयार नहीं हो रही थी। लोग दिलचस्पी से हर्ष के प्रोजेक्ट को सुनते तो थे, लेकिन उन्हें आर्थिक मदद देने का राजी नहीं थे।
ऐसे में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना ने हर्ष के सपनों को उड़ान भरने के लिये पंख का काम किया। उन्हें इस योजना के तहत 1 करोड़ रूपये का लोन मिला, जिससे उन्होंने मक्सी रोड में 1 फैक्टरी शुरू की। वर्तमान में प्लास्टिक पर्यावरण के लिये 1 गंभीर खतरा है। इसका 1 बेहतरीन और आधुनिक विकल्प है बायोडिग्रेडेबल पदार्थों का उपयोग। हर्ष की फैक्टरी में पेपर कप और पेपर के कैरीबैग बनाये जाते हैं तथा बड़ी तादाद में दुकानदारों को सप्लाइ किये जाते हैं। इनके इस्तेमाल से पर्यावरण और पशुओं को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। पेपर प्लास्टिक का एक अत्यन्त उत्तम विकल्प है। आमजन में भी इसके उपयोग का रूझान बढ़ा है। वर्तमान समय की मांग है बायोडिग्रेडेबल पदार्थ।
सन्देश और हर्ष ने यह साबित किया है कि आजकल के युवाओं को बस एक सुनहरे अवसर की तलाश है। उनकी योग्यता को पहचानने की देरी है। बस 1 बार उन्हें मौका दिया जाये तो देखिये वे किस तरह रॉकेट की तरह आसमान में उड़ान भरते हैं। सन्देश और हर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को युवाओं के लिये यह योजना लाने के लिये “थैंक्स ए लॉट मामाजी” कहते हैं। अगर ये योजना नहीं होती तो आज ये दोनों इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाते। युवा उद्यमी योजना प्रदेश के युवाओं के सपनों को हकीकत में बदलने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है। (फोटो संलग्न)
क्रमांक 2316 अनिकेत शर्मा/जोशी