May 25, 2018

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क्वालिटी ठीक नहीं हो तो कंसाइनमेंट वापस करें, महिला बाल विकास विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में कमिश्नर ने दिये निर्देश

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उज्जैन 29 सितम्बर। आंगनवाड़ियों में भेजे जाने वाले पोषण आहार की यदि क्वालिटी ठीक नहीं हो तो सम्बन्धित कंसाइनमेंट को वापस करें। साथ ही लिखित में दें कि गुणवत्ता खराब होने के कारण अमुक ठेकेदार का पोषण आहार वापस किया जा रहा है। किसी भी स्थिति में आंगनवाड़ियों में दिये जाने वाले पोषण आहार एवं मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता निम्न नहीं होनी चाहिये, नहीं तो विभाग के सम्बन्धित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

संभागायुक्त श्री रवीन्द्र पस्‍तोर ने गुरूवार को मेला कार्यालय के सभाकक्ष में महिला बाल विकास की संभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिये।

5 अक्टूबर तक रिक्त पद भरें

संभाग की आंगनवाड़ियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों की भर्ती के सम्बन्ध में संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि यह कार्य आगामी 5 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाये। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सर्वाधिक पद उज्जैन जिले में 13 तथा सबसे कम पद नीमच जिले में 5 रिक्त हैं। आंगनवाड़ी सहायिका के संभाग में 146 तथा उज्जैन जिले में 19 पद रिक्त हैं। संभाग में 10365 आंगनवाड़ियों में 10365 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं 9172 सहायिकाओं के पद हैं। उज्जैन जिले में 2066 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के तथा 1888 आंगनवाड़ी सहायिका के पद स्वीकृत हैं।

बाद में भुगतान क्यों?

संभाग में किराये के भवनों में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों के किराये के भुगतान की समीक्षा में संभागायुक्त ने पूछा कि जब शासन के निर्देश हैं कि भवन किराया अग्रिम रूप से दिया जाये तथा उसके अनुरूप 3-3 माह का आवंटन भी विभाग को दिया जाता है, तो फिर किराये के भुगतान में विलम्ब क्यों होता है? आंगनवाड़ियों के किराये का समय पर सम्बन्धितों को भुगतान किया जाये।

सिद्ध कीजिए कि झुग्गी-झोपड़ियों में जाता है पोषण आहार

शासन की योजना अन्तर्गत झुग्गी-झोपड़ियों में पोषण आहार प्रदाय की स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा कि यदि झुग्गी-झोपड़ियों में पोषण आहार दिया जाता है तो सिद्ध करें कि झुग्गी-झोपड़ियों में पोषण आहार जाता है। उज्जैन जिले में आंगनवाड़ियां एवं झुग्गी-झोपड़ियां मिलाकर कुल 74247 हितग्राहियों को पोषण आहार दिया जाता है, अब बताईए कि झुग्गी-झोपड़ियों में कितने हितग्राहियों को पोषण आहार मिलता है। इस पर अधिकारीगण आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर पाए। तब कमिश्नर ने निर्देश दिये कि नियमित रूप से झुग्गी-झोपडि़यों में पोषण आहार का प्रदाय सुनिश्चित किया जाये।

महिदपुर क्या अमेरिका या रूस है?

आंगनवाड़ियों में कुपोषण की स्थिति की समीक्षा में कुछ क्षेत्रों में कुपोषण शून्य बताया गया, तो संभागायुक्त ने सम्बन्धित अधिकारियों से प्रश्न किया कि “महिदपुर क्या अमेरिका या रूस है, जो वहां कुपोषण शून्य प्रतिशत है?” आंकड़े सही दें, गलत नहीं। साथ ही उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये कि संभाग के सभी जिलों के आंगनवाड़ी केन्द्र, जहां कुपोषण की स्थिति शून्य प्रतिशत बताई गई है, वहां विशेष दल भेजकर जांच कराई जाये। जांच में इस बात का ध्यान रखा जाये कि अधिकारी अपने ही क्षेत्र की जांच न करे, एक क्षेत्र के अधिकारी को दूसरे क्षेत्र में जांच के लिये भेजा जाये। जांच में यदि उक्त आंकड़े गलत पाये जाते हैं तो सख्त कार्यवाही की जायेगी। बैठक में बताया गया था कि महिदपुर, उज्जैन-2 तथा उज्जैन-3 क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों की संख्या शून्य है।

माताओं की काउंसलिंग करें

संभाग के पोषण पुनर्वास केन्द्रों के कार्य की समीक्षा के दौरान संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि केन्द्रों की संख्या सीमित होने के कारण यह आवश्यक है कि कुपोषित बच्चों की माताओं की काउंसलिंग की जाये तथा उन्हें बताया जाये कि बच्चों को किस प्रकार का आहार दिया जाये तथा उनकी देखभाल किस प्रकार से की जाये। बताया गया कि छोटे बच्चों को दूध में नारियल का तेल मिलाकर देने से उनका कुपोषण तेजी से दूर होता है। बताया गया कि उज्जैन संभाग में कुल 412 पोषण पुनर्वास केन्द्र तथा उज्जैन‍ जिले में कुल 90 पोषण पुनर्वास केन्द्र हैं।

अपने काम के साथ व्यवहार में परिवर्तन लायें

संभाग के समस्त अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे आवश्यकता से अधिक बैठकें न करें। अधिक बैठकों से समय की बर्बादी होती है, जिससे समय पर लक्ष्य की पूर्ति भी नहीं हो पाती है। अधिकारी अपने मातहत अधिकारियों-कर्मचारियों से ऑनलाइन चर्चा करें एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दें। अधिकारी अपने काम के साथ व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन लायें और अपने-अपने जिले में अधिक से अधिक हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का फायदा पहुंचायें।

कार्य खुशी से करें

जिलेवार विभिन्न योजनाओं की क्रमवार समीक्षा करने के अन्त में संभागायुक्त डॉ.पस्तोर ने बड़े सहज, सरल लहजे में अधिकारियों से कहा कि वह शासकीय कार्य को तनाव में न करते हुए खुशी के साथ काम करें। खुशी से किये जाने वाले काम में मन प्रसन्न रहता है और होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। अपने कार्य में कभी भी बोझ का भाव न आने दें, जो भी काम करें, वह ठोस करें।

अपने वरिष्ठों को कार्य दिखायें

संभागायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जो भी आंकड़े प्रस्तुत करें, वे वास्तविक होने चाहिए। अपने क्षेत्र में अच्छा काम करें और किये गये कार्य को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाने की चेष्टा करें। काम में कमिटमेंट हो। अच्छा काम होने पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल पर फेसबुक या वाट्सअप सन्देश भेजें। जनता की उम्मीदों पर हम खरे उतरें।

भ्रमण की तिथि अंकित की जाये

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अपने-अपने क्षेत्र में समय-समय पर भ्रमण करें। भ्रमण की तिथि को ग्राम पंचायत एवं आंगनवाड़ी भवन की दीवार पर अंकित किया जाये। अधिकारी-कर्मचारी अपने काम को मजबूरी से न करें, मन से कार्य करेंगे तो लोगों को फायदा पहुंचेगा। बेहतर काम का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाये, ताकि दूसरे उसका अनुसरण कर सकें। जिन जिलों में अच्छे काम हुए हैं, उनकी संभागायुक्त डॉ.पस्तोर ने सराहना की और जिन जिलों में लक्ष्य से कम काम हुए हैं, उन्हें निर्देश दिये कि वे अपने काम में और तेजी लायें और लक्ष्य को समय पर पूरा करें। अनुशासन से काम करें।

वेतन शत-प्रतिशत, तो काम भी शत-प्रतिशत होना चाहिये

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये एक कैलेण्डर बनाया जाये और उसी के आधार पर समयानुसार काम किया जाये। जब हम वेतन शत-प्रतिशत लेते हैं, तो उसी प्रकार से सौंपे गये दायित्वों का निर्वहन भी शत-प्रतिशत होना चाहिये। हमारे दायित्वों से अनेक हितग्राहियों का हित जुड़ा है और उनके हितों के लिये हमें शासन ने पदस्थ किया है, इसलिये समय पर योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को पहुंचाने का काम करें।

बैठक में संभागायुक्त डॉ.रवीन्द्र पस्‍तोर ने स्व-सहायता समूह के देयकों के भुगतान, वजन लिये गये बच्चों एवं पोषण स्तर की स्थिति, उषा किरण योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, स्वागतम लक्ष्मी योजना, लाड़ो अभियान, शौर्या दल, बेटी बचाओ अभियान, मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना, महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, स्नेह सरोकार, आदर्श आंगनवाड़ी केन्द्र आदि कार्यक्रमों एवं योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि समय पर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाये।

उल्लेखनीय है कि उज्जैन संभाग के सात जिलों में 58 परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें उज्जैन जिले में 14, देवास जिले में नौ, शाजापुर जिले में छह, रतलाम जिले में 10, मंदसौर जिले में नौ, नीमच जिले में छह और आगर-मालवा जिले में चार परियोजनाएं संचालित हैं। संभाग में 9172 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं 1191 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं।

बैठक में संयुक्त आयुक्त श्री प्रतीक सोनवलकर, महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री डी.के.सिद्धार्थ, उप संचालक महिला सशक्तिकरण सुश्री शुभांगी मुजूमदार, संभाग के सभी जिलों के महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला सशक्तिकरण अधिकारी, जिलों की आईसीडीएस के सहायक संचालक, समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी तथा खण्ड सशक्तिकरण अधिकारी आदि उपस्थित थे।

पंकज मित्तल (मो.नं.-9301209255) (फोटो संलग्न)

-संतोष कुमार उज्जैनिया (मो.नं.-9425379653)

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