October 21, 2018

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कुछ करने की ललक ने भावना को दिल्ली तक पहुंचाया

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बना जीवन में बदलाव का जरिया

उज्जैन 22 मार्च। राज्य शासन द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चलाया जाता है। इन विद्यालयों में कक्षा 5वी के बाद आवासीय ब्रिज कोर्स के द्वारा शालात्यागी और अप्रवेशी बालिकाएं निवासरत रहकर पढ़ाई करती हैं। ऐसी ही प्रेम नगर उज्जैन निवासी बालिका भावना परमार ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय में जुलाई-2007 में प्रवेश लिया। सर्वे के दौरान यह बालिका सर्वेकर्ताओं से मिली और उन्हें पढ़ने की इच्छा जताई। पढ़ने की ललक ही थी, जिसने भावना को सदैव प्रथम श्रेणी में पास करवाया और आज वह नर्सिंग ट्रेनिंग लेकर दिल्ली के साकेत मैक्स अस्पताल में नर्स के पद पर कार्यरत है। भावना आज अपने पैरों पर खड़ी होकर मेट्रो सिटी में लगभग 40 हजार रूपये प्रतिमाह कमा रही है।

माता-पिता से पूछे बिना ही छात्रावास में प्रवेश लिया था

भावना में पढ़ाई को लेकर कितनी ललक थी, इसकी तीव्रता इसी बात से समझी जा सकती है कि कस्तूरबा बालिका विद्यालय के लिये जब टीचर्स सर्वे कर रहे थे, तो उसने माता-पिता से बिना पूछे ही छात्रावास में प्रवेश लेने की जिद की और प्रवेश ले लिया। प्रवेश लेने के बाद ही उसने माता-पिता को सूचित किया और बाद में घर जाकर अपना सामान लेकर आई। माता-पिता को तमाम आशंकाएं थी। कहीं कोई गलत लोग बेटी को बहका कर न ले जाये। उन्हें जब शासकीय संस्थान के बारे में जानकारी मिली तो वे सहज ही बेटी को छात्रावास में भेजने के लिये तैयार हो गये।

भावना कक्षा 6 के लिये कस्तूरबा गांधी विद्यालय में भर्ती हो गई। उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर थी। भावना ने कक्षा 6 से 8 तक स्कूल की परीक्षा में टॉप किया। इसके अलावा वह अन्य गतिविधियों में भी अग्रणी रहती थी। कक्षा 8वी अच्छे नम्बरों से पास होने के बाद भावना को आसानी से शासकीय उच्चतर कन्या माध्यमिक विद्यालय में एडमिशन मिल गया। इसी के साथ वह उत्कृष्ट कन्या छात्रावास की प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण हो गई और 9वी से 12वी तक यहीं रहकर पढ़ाई की। भावना जब 12वी कक्षा में अध्ययनरत थी, उसी समय जनरल नर्सिंग की प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई और ग्वालियर नर्सिंग कॉलेज में भी उसका एडमिशन हो गया। नर्सिंग कोर्स पूरा करने के बाद आज भावना दिल्ली के साकेत मेक्सो अस्पताल में नर्स के पद पर कार्यरत है। भावना कस्तूरबा गांधी विद्यालय को कभी नहीं भूलती है और कहती है कि उसके जीवन में बदलाव इसी विद्यालय से आया है। भावना को जब भी समय मिलता है, उज्जैन आकर वह अपने जैसी दूसरी
 

बच्चियों को भी पढ़ाई के लिये प्रेरित करती है। भावना का मानना है कि यदि राज्य सरकार की  सहायता नहीं मिलती तो आज उनका जीवन इस स्तर पर नहीं पहुंचता। वे कहती है कि 6टी से लेकर 12वी तक की शिक्षा में न तो उन्हें एक रूपया खर्च करना पड़ा न ही रहने-खाने का खर्च उनके परिवार को उठाना पड़ा।                                                     (फोटो संलग्न)

क्रमांक 0846                                                               एचएस शर्मा/जोशी